कुशीनगर: उत्तर प्रदेश का कुशीनगर जिला इन दिनों अपराधियों के साये में जी रहा है। पिछले महज 12 दिनों में हुई आधा दर्जन से अधिक खूनी वारदातों ने पूरे जिले की कानून-व्यवस्था को कठघरे में खड़ा कर दिया है। सरेआम चाकूबाजी और निर्मम हत्याओं ने शासन के ‘जीरो टॉलरेंस’ के दावों की धज्जियां उड़ा दी हैं।
क्राइम का काला चिट्ठा: 12 दिनों की खौफनाक टाइमलाइन
- 02 अगस्त (तमकुहीराज): 16 वर्षीय किशोर आदर्श चौहान की पीट-पीटकर और पेट में चाकू घोंपकर बेरहमी से हत्या।
- 01 अगस्त (विशुनपुरा): तिलकपट्टी चौराहे पर बाइक सवार युवक पर बदमाशों का कातिलाना चाकू हमला।
- 27 जुलाई (कुबेरस्थान): गंडक नहर के पास हीरालाल नामक व्यक्ति की धारदार हथियारों से नृशंस हत्या।
- 23 जुलाई (रामकोला): सोते हुए व्यक्ति पर जानलेवा हमला, इलाज के दौरान मौत।
- जुलाई का अंतिम सप्ताह (कसया): मामूली विवाद में पिता-पुत्र पर चाकुओं से ताबड़तोड़ हमला।
पुलिस की सुस्त कार्यशैली पर सवाल
लगातार हो रही इन आपराधिक घटनाओं ने स्थानीय निवासियों में भारी दहशत पैदा कर दी है। सवाल यह उठ रहा है कि आखिर अपराधियों के हौसले इतने बुलंद कैसे हो गए? क्या पुलिस की बीट व्यवस्था पूरी तरह विफल हो चुकी है? ग्रामीणों का कहना है कि पुलिस केवल घटना के बाद खानापूर्ति करती है, जबकि अपराध को रोकने के लिए कोई ठोस खुफिया तंत्र काम नहीं कर रहा है।
अवैध हथियारों का जखीरा
छोटी-छोटी बातों पर चाकू और धारदार हथियारों का उपयोग यह साबित करता है कि जिले में अवैध हथियारों की तस्करी और उपलब्धता पर लगाम लगाने में स्थानीय पुलिस नाकाम रही है। यदि समय रहते कड़ी कार्रवाई नहीं की गई, तो कुशीनगर में कानून का इकबाल पूरी तरह खत्म हो जाएगा।