नई दिल्ली में जंतर-मंतर पर हाल ही में हुए ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के विवादित प्रदर्शन ने अब एक नया कानूनी मोड़ ले लिया है। दिल्ली पुलिस ने इस मामले में सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो की गहन जांच शुरू कर दी है, जिसके तार अब एक संगठित डिजिटल साजिश से जुड़ते नजर आ रहे हैं।
डिजिटल पीआर का काला सच
जांच में सामने आया है कि सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वह विवादास्पद वीडियो स्वतः (ऑर्गेनिक) वायरल नहीं था, बल्कि इसे एक सुनियोजित रणनीति के तहत ‘मैनिपुलेट’ किया गया था। पुलिस के रडार पर अब 3 बड़ी डिजिटल मार्केटिंग एजेंसियां और 100 से अधिक यूट्यूबर्स हैं। तकनीकी विश्लेषण में यह साफ हुआ है कि एल्गोरिदम के साथ छेड़छाड़ कर इस कंटेंट को कृत्रिम रूप से बढ़ावा दिया गया था।
मुंबई कनेक्शन और फंडिंग की जांच
सूत्रों के अनुसार, इस पूरे सिंडिकेट का संचालन मुंबई स्थित एक प्रमुख इन्फ्लुएंसर मार्केटिंग एजेंसी के माध्यम से हो रहा था। पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि आखिर इस डिजिटल प्रोपेगैंडा के लिए फंड कहां से आया और किन प्रभावशाली लोगों को प्रदर्शन को हवा देने का काम सौंपा गया था। जल्द ही संबंधित एजेंसियों के अधिकारियों को पूछताछ के लिए तलब किया जाएगा।
सुप्रीम कोर्ट में गूंजी आवाज
दूसरी ओर, 20 जुलाई के ‘संसद चलो’ मार्च में घायल हुई IIT पटना की छात्रा तोशिवा यादव ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। उन्होंने विरोध प्रदर्शनों के दौरान भीड़ नियंत्रण के लिए एक समान SOP और पुलिसकर्मियों के लिए ‘नेम बैज’ पहनना अनिवार्य करने की मांग की है।
दिल्ली पुलिस की यह कार्रवाई स्पष्ट करती है कि डिजिटल स्पेस का गलत इस्तेमाल कर देश की शांति व्यवस्था और संवैधानिक संस्थाओं को निशाना बनाने वाले तत्वों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।