रांची: झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की 14वीं सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा में हुई कथित गड़बड़ियों और धांधली के आरोपों ने राज्य की सियासी फिजाओं में उबाल ला दिया है। एक ओर जहाँ भारतीय जनता पार्टी (BJP) और आजसू (AJSU) ने सड़क से सदन तक सरकार को घेरने की रणनीति अपनाई है, वहीं दूसरी ओर इंडिया गठबंधन के भीतर ही चुप्पी और दुविधा की स्थिति बनी हुई है।
एनडीए में बंटी राय
विपक्ष के भीतर भी सब कुछ सामान्य नहीं दिख रहा है। भाजपा और आजसू के कार्यकर्ता जहां युवाओं के भविष्य का हवाला देकर आक्रामक रुख अपनाए हुए हैं, वहीं एनडीए के घटक दल जेडीयू (JDU) और एलजेपी-रामविलास (LJP-R) ने इस पूरे मामले पर फिलहाल चुप्पी साधे रखना ही बेहतर समझा है।
गठबंधन का बचाव और सन्नाटा
नीट (NEET) पेपर लीक पर मुखर रहने वाली कांग्रेस और राजद (RJD) का झारखंड में रुख हैरान करने वाला है। कांग्रेस ने पूरे मामले को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के पाले में डाल दिया है। झामुमो (JMM) का कहना है कि सरकार ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति पर काम कर रही है और खुद सीएम पूरे घटनाक्रम की मॉनिटरिंग कर रहे हैं। दिलचस्प बात यह है कि सत्तारूढ़ गठबंधन में शामिल राजद और वाम दलों ने इस पूरे विवाद पर पूरी तरह से मौन साध रखा है, जो राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है।
जयराम महतो और JLKM की स्थिति
छात्र राजनीति की धुरी बने जयराम महतो और उनकी पार्टी JLKM भी इस बड़े मुद्दे पर फिलहाल बैकफुट पर नजर आ रही है। हालांकि, पार्टी के कुछ नेता व्यक्तिगत स्तर पर छात्रों के आंदोलन का समर्थन कर रहे हैं, लेकिन आधिकारिक रूप से पार्टी ने कोई बड़ा रुख नहीं अपनाया है। छात्रों के भविष्य के साथ जुड़े इस मामले में यह ‘सियासी सन्नाटा’ आने वाले दिनों में क्या मोड़ लेगा, यह देखना महत्वपूर्ण होगा।